
चंडीगढ़.
दिसंबर में होने वाले चंडीगढ़ नगर निगम चुनाव को लेकर आज यानी शुक्रवार को वार्ड रिजर्वेशन का ड्रॉ निकाला गया। सेक्टर-6 स्थित यूटी गेस्ट हाउस में स्टेट इलेक्शन कमिश्नर की निगरानी में ड्रॉ हुआ।
वार्ड आरक्षण ड्राॅ में सात वार्ड अनुसूचित जाति (एससी) के लिए आरक्षित किए गए हैं। इनमें वार्ड-29, वार्ड-4, वार्ड-9, वार्ड-15, वार्ड-1, वार्ड-3 और वार्ड-32 शामिल हैं।
इन सात एससी वार्डों में से वार्ड-29, वार्ड-3 और वार्ड-32 एससी महिला के लिए आरक्षित किए गए हैं, जबकि बाकी चार वार्ड एससी महिला और पुरुष दोनों के लिए खुले रहेंगे। आरक्षण की इस तस्वीर से कई मौजूदा पार्षदों की चुनावी तैयारी और राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। इस बार आरक्षण ड्राॅ की प्रक्रिया में नगर निगम के कुल 35 वार्डों में से पहले से आरक्षित 16 वार्डों को शामिल नहीं किया गया। इन 16 वार्डों को बाहर करने के बाद बचे 19 वार्डों में ही नया ड्राॅ हुआ। इसी ड्राॅ में सात वार्ड एससी और नौ वार्ड सामान्य वर्ग की महिलाओं के लिए आरक्षित किए गए। यानी बचे 19 वार्डों में से कुल 16 वार्ड आरक्षित हो गए, जबकि सिर्फ तीन वार्ड सामान्य श्रेणी के लिए बचे।
वर्ष 2021 के चुनाव में एससी के लिए वार्ड-7, 16, 19, 24, 26, 28 और 31 आरक्षित थे। इनमें वार्ड-16, 19 और 28 एससी महिला के लिए आरक्षित किए गए थे। इस बार एससी आरक्षण पूरी तरह नए वार्डों में चला गया है। वार्ड-29, 4, 9, 15, 1, 3 और 32 को एससी के लिए आरक्षित किए जाने से इन वार्डों में अब एससी वर्ग के उम्मीदवारों के बीच मुकाबला होगा। आरक्षण का सबसे बड़ा असर मौजूदा पार्षदों पर दिखाई देगा। वार्ड-3 से भाजपा के पार्षद दलिप शर्मा लगातार तीसरी जीत की तैयारी में थे, लेकिन वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने से अब उन्हें दूसरे वार्ड से चुनावी जमीन तलाशनी पड़ सकती है। वार्ड-4 की पार्षद और डिप्टी मेयर सुमन शर्मा के सामने भी यही चुनौती खड़ी हो गई है।
वार्ड-9 की भाजपा पार्षद बिमला दुबे भी अब अपने मौजूदा वार्ड से चुनाव नहीं लड़ पाएंगी। वार्ड-15 के रामचंद्र यादव के लिए भी आरक्षण बड़ा राजनीतिक झटका माना जा रहा है। यादव हाल ही में कांग्रेस में शामिल हुए हैं। अब वार्ड एससी के लिए आरक्षित होने के बाद उन्हें भी नई सीट तलाशनी होगी।
वार्ड-29 में आप के टिकट पर जीतकर बाद में कांग्रेस में शामिल हुए मुन्नवर के लिए भी मौजूदा वार्ड की सीट बदल गई है। वहीं वार्ड-32 के भाजपा पार्षद और सीनियर डिप्टी मेयर जसमानप्रीत सिंह के सामने भी अब नई राजनीतिक जमीन तलाशने की चुनौती होगी। एससी महिला के लिए आरक्षित तीन वार्डों में वार्ड-29, वार्ड-3 और वार्ड-32 शामिल होने से इन सीटों पर अब एससी महिला उम्मीदवार ही चुनाव लड़ सकेंगी। वहीं नौ सामान्य महिला वार्डों के आरक्षण से भी कई मौजूदा पुरुष पार्षदों को अपनी सीट छोड़कर नए वार्ड में जाना पड़ सकता है। ऐसे में आरक्षण ड्राॅ ने चुनाव से पहले ही नगर निगम की राजनीति में बड़े बदलाव के संकेत दे दिए हैं।



