मध्य प्रदेश

इंदौर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला, पति से अलग रह रही गर्भवती महिला को गर्भपात की अनुमति

इंदौर
 इंदौर हाई कोर्ट ने एक महिला को गर्भपात कराने की अनुमति दे दी है. महिला अपने पति से काफी दिनों से अलग रह रही थी और दोनों के बीच तलाक को लेकर सहमति भी बन गई थी. लेकिन पति के मुकर जाने के बाद और कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं होने के चलते इंदौर हाईकोर्ट ने इस पूरे मामले में पीड़िता को इस तरह की अनुमति दी है. कोर्ट ने मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट, 1971 के तहत यह फैसला सुनाया है। 

गर्भवती महिला ने लगाई थी याचिका
इंदौर हाईकोर्ट के जस्टिस संदीप एन. भट्ट की एकल पीठ में महिला की ओर से एक याचिका लगाई गई थी. जिस पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि महिला पति से अलग रह रही है और आगे वैवाहिक संबंध नहीं रखना चाहती है. ऐसे में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत उसे अपनी प्रजनन संबंधित स्वतंत्रता का अधिकार प्राप्त है. इसी कानून के तहत उसे गर्भपात करने की अनुमति दी जाना चाहिए। 

कोर्ट के सामने पेश नहीं हुआ पति
बता दें कि पति-पत्नी दोनों में तलाक को लेकर सहमति बन गई थी, लेकिन इसी दौरान पति तलाक देने से मुकर गया जिसके चलते कोर्ट ने उसे नोटिस जारी किया. लेकिन वह कोर्ट के समक्ष उपस्थित नहीं हुआ और लेकिन उसके बाद भी पति-पत्नी अलग रह रहे थे. पत्नी ने गर्भपात करवाने को लेकर इंदौर हाईकोर्ट की शरण ली और कोर्ट को उसके द्वारा इस बात की जानकारी दी कि उसे 13 हफ्ते का गर्भ है. कोर्ट ने तमाम दलीलों को सुनने के बाद उसे गर्भपात करने की अनुमति दे दी है. फैसला सुनाते हुए कोर्ट ने यह भी कहा है कि, महिला को गर्भपात के लिए पति की सहमति की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि पति उससे अलग रह रहा है। 

क्या है मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट एक मौलिक मानवाधिकार है, जो महिलाओं को परिवार नियोजन, गर्भधारण करने या न करने, और बच्चों की संख्या व अंतराल के बारे में फैसला करने का अधिकार देता है. खास बात यह है कि, पति-पत्नी के बीच चल रहा अलगाव भी अबॉर्शन की अनुमति के लिए एक वैध और कानूनी आधार माना जा सकता है। 

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button