
चंडीगढ़.
पंजाब में मतदाता सूचियों के पुनरीक्षण को लेकर पूर्व विशेष मुख्य सचिव केबीएस सिद्धू ने कहा है कि किसी मतदाता के नाम को उसके माता-पिता की 2002-03 की मतदाता सूची में दर्ज नाम से मैप करना कानून में निर्धारित शर्त नहीं है।
उन्होंने कहा कि ऐसी कृत्रिम शर्त को पुनरीक्षण प्रक्रिया में शामिल किया गया है, जिसके कारण मतदाताओं को नोटिस जारी किए जा रहे हैं। सिद्धू ने कहा कि पंजाब में 13 अगस्त को प्रकाशित ड्राफ्ट मतदाता सूची से 20 लाख से अधिक मतदाताओं को अनुपस्थित, स्थानांतरित, मृत या डुप्लीकेट श्रेणी में रखकर बाहर किया गया है। उन्होंने ऐसे लोगों से नया फार्म-6 भरकर मतदाता सूची में अपना नाम दर्ज कराने की अपील की है।
"एसआईआर" में 12.8 लाख मतदाता लापता
पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी कार्यालय द्वारा 4 अगस्त 2026 को जारी किए गए उत्सवपूर्ण प्रेस नोट में, विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) 2026 के घर-घर जनगणना चरण के समापन के उपलक्ष्य में, एक ऐसा वाक्य छिपा है जिस पर जनता का ध्यान कहीं अधिक जाना चाहिए। मुख्य निर्वाचन अधिकारी, सुश्री अनिंदिता मित्रा, आईएएस ने कहा कि मसौदा मतदाता सूची में शामिल 93.40% मतदाताओं का मिलान 2003 की मतदाता सूचियों या पिछली एसआईआर की सूचियों से सफलतापूर्वक कर लिया गया है। इसके बाद का गणित स्पष्ट है: लगभग 6.60% – 1,93,94,408 एकत्रित जनगणना प्रपत्रों के आधार पर, लगभग 12.8 लाख पंजाबी मतदाता – वर्तमान में मिलान से बाहर हैं। इस समूह को नोटिस 13 अगस्त 2026 से भेजे जाने शुरू होंगे, "ईसीआई के निर्देशों के अनुपालन में।"
2.14 करोड़ पंजीकृत मतदाताओं वाले राज्य के लिए 12.8 लाख कोई मामूली संख्या नहीं है। यह कई विधानसभा क्षेत्रों के मतदाताओं की कुल संख्या से भी कहीं अधिक है। प्रत्येक प्रभावित नागरिक और वास्तव में पंजाब की लोकतांत्रिक प्रक्रिया के प्रत्येक जागरूक पर्यवेक्षक का यह प्रश्न पूछने का पूरा अधिकार है: आगे क्या होगा और इसका क्या समाधान है? समाधान पर चर्चा करने से पहले, प्रेस विज्ञप्ति में उल्लिखित श्रेणियों के अनुसार, पंजाब के 2.14 करोड़ मतदाताओं को जिन विशिष्ट वर्गों में विभाजित किया गया है, उन्हें स्पष्ट रूप से समझना आवश्यक है। ये शब्द एक दूसरे के पर्यायवाची नहीं हैं, और इन्हें आपस में मिलाना समस्या की गंभीरता को गलत समझने का सबसे पक्का तरीका है।



