झारखंड/बिहारराज्य

बिहार में एआई और रोबोटिक सर्जरी से आसान हुआ कैंसर और लिवर जैसी जटिल बीमारियों का इलाज

पटना 

बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था अब एक डिजिटल और तकनीकी परिवर्तन के दौर से गुजर रही है। राज्य में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और रोबोटिक सर्जरी के बढ़ते प्रभाव ने गंभीर बीमारियों के उपचार को न केवल सुलभ, बल्कि अधिक सटीक और सुरक्षित बना दिया है। पटना में आयोजित दो दिवसीय IASG CON-2026 मिड-टर्म कॉन्फ्रेंस में विशेषज्ञों ने साझा किया कि कैसे इन तकनीकों ने कैंसर और लिवर जैसी जटिल बीमारियों के सक्सेस रेट को बढ़ा दिया है।

बड़े शहरों पर निर्भरता हुई कम
​IGIMS के सर्जिकल गैस्ट्रोएंटेरोलॉजी और लिवर ट्रांसप्लांट विभाग द्वारा आयोजित इस सम्मेलन में यह बात उभरकर आई कि आधुनिक सुविधाओं के कारण अब बिहार के मरीजों का दिल्ली या मुंबई जैसे महानगरों की ओर पलायन कम हो रहा है। एआई-आधारित सिस्टम अब शुरुआती चरण में ही बीमारियों की पहचान करने में सक्षम हैं, जिससे इलाज का समय पर शुरू होना संभव हो पा रहा है।

रोबोटिक सर्जरी: कम चीरा, जल्द रिकवरी
​अमेरिका से आए प्रसिद्ध रोबोटिक सर्जन डॉ. थैबम थंबी पिल्लै ने सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए बताया कि रोबोटिक तकनीक से सर्जन सूक्ष्म स्तर पर जाकर ऑपरेशन कर सकते हैं। इसके प्रमुख लाभ इस प्रकार हैं:

    ​न्यूनतम चीरा: ऑपरेशन के दौरान स्वस्थ ऊतकों को कम नुकसान पहुंचता है।
    ​कम रक्तस्राव: पारंपरिक सर्जरी की तुलना में खून का रिसाव बहुत कम होता है।
    ​संक्रमण का अभाव: छोटे घाव होने के कारण इंफेक्शन का खतरा न्यूनतम हो जाता है।
    ​त्वरित रिकवरी: मरीज को कम दर्द होता है और वह बहुत जल्द अपने सामान्य जीवन में लौट आता है।

​मानवीय त्रुटियों में कमी और सटीक निर्णय
​IASG के अध्यक्ष डॉ. टी.डी. यादव और सचिव डॉ. सुजय पॉल ने स्पष्ट किया कि एआई तकनीक सर्जरी के दौरान रियल-टाइम डेटा प्रदान करती है, जिससे मानवीय त्रुटियों की संभावना काफी कम हो जाती है। विशेष रूप से पैंक्रियाज और गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल ऑपरेशन में, जहां पहले बड़े चीरे लगाने पड़ते थे, अब रोबोटिक आर्म्स की मदद से जटिल प्रक्रियाएं भी सरलता से पूरी की जा रही हैं।

आत्मनिर्भर बिहार की ओर कदम
​सम्मेलन में आयोजित 21 वैज्ञानिक सत्रों ने स्थानीय डॉक्टरों को वैश्विक मानकों से रूबरू कराया। विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में एआई और रोबोटिक्स का दायरा और बढ़ेगा, जिससे बिहार चिकित्सा के क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बनेगा। यह बदलाव न केवल स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ा रहा है, बल्कि बिहार को एक मेडिकल हब के रूप में भी स्थापित कर रहा है।

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