झारखंड/बिहारराज्य

कोडरमा में धान की बंपर खरीदी से पैक्स गोदाम फुल, झारखण्ड में बना नंबर वन

कोडरमा.

धान क्रय के मामले में कोडरमा जिला पूरे राज्य में नंबर वन पर है। जिले को मिले एक लाख क्विंटल धान क्रय के लक्ष्य के विरुद्ध अब तक लगभग 50 प्रतिशत धान की खरीद की जा चुकी है। इस वर्ष धान क्रय के साथ ही किसानों को उनके बैंक खाते में समय पर भुगतान भी किया जा रहा है, जिससे किसानों में संतोष देखा जा रहा है। हालांकि इसके बावजूद पैक्स स्तर पर धान क्रय की प्रक्रिया फिलहाल प्रभावित हो रही है।

जिले में इस बार धान क्रय के लिए कुल 30 पैक्स एवं दो महिला मंडलों का चयन किया गया है। 15 दिसंबर से शुरू हुई धान खरीद में अब तक करीब 50 हजार क्विंटल धान किसानों से खरीदा जा चुका है। इनमें से लगभग 20 हजार क्विंटल धान मिलरों को भेजा गया है। लेकिन बीते एक सप्ताह से अधिकांश पैक्सों में धान क्रय लगभग ठप है। पैक्स संचालकों के अनुसार गोदाम पूरी तरह धान से भर चुके हैं।

मिलों की ओर से धान का उठाव नहीं हो पाने के कारण आगे क्रय संभव नहीं हो पा रहा है। बताया जा रहा है कि मिल संचालकों को एफसीआई को दिए जाने वाले चावल के बदले धान उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन समय पर सीएमआर (कस्टम मिल्ड राइस) की आपूर्ति नहीं होने के कारण धान का उठाव प्रभावित हुआ है।

पैक्स गोदामों में धान डंप, आगे की खरीद हो रही प्रभावित 
इसके चलते पैक्स गोदामों में धान डंप हो गया है। गोदाम खाली होने के बाद ही आगे धान क्रय किया जा सकेगा। इस स्थिति से किसानों की चिंता भी बढ़ने लगी है, हालांकि प्रशासन उन्हें धैर्य रखने की अपील कर रहा है। इस संबंध में जिला आपूर्ति पदाधिकारी (डीएसओ) प्रदीप शुक्ला ने कहा कि धान क्रय के लिए 31 मार्च तक का समय निर्धारित है, इसलिए किसानों को घबराने की आवश्यकता नहीं है। कोडरमा जिला राज्य में धान क्रय में सबसे आगे है और लक्ष्य का 50 प्रतिशत पहले ही हासिल कर लिया गया है, जबकि अभी ढाई माह से अधिक का समय शेष है।

इस बार सरकार की ओर से लागू की गई हैं कई शर्तें
उन्होंने बताया कि इस बार सरकार की ओर से कई शर्तें लागू की गई हैं, जिनमें अग्रिम धान नहीं लेना, छुट्टी व रविवार को धान क्रय नहीं करना तथा पैक्सों को लक्ष्य निर्धारित करना शामिल है। डीएसओ ने बताया कि पैक्सों में किसानों का धान पहुंचते ही दो से सात दिनों के भीतर भुगतान किया जा रहा है। मिल संचालकों द्वारा सीएमआर की आपूर्ति होते ही धान का उठाव शुरू होगा और इसके बाद क्रय प्रक्रिया फिर से तेज हो जाएगी।

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