धर्म अध्यात्म

शरद पूर्णिमा 25 अक्टूबर को, मां लक्ष्मी की पूजा और चांदनी में खीर रखने की परंपरा।

 शरद ऋतु की शीतल चांदनी, छतों पर रखी खीर और मां लक्ष्मी की आराधना। शरद पूर्णिमा की रात आस्था, आरोग्य और समृद्धि का संदेश लेकर आएगी। 25 अक्टूबर को शरद पूर्णिमा, कोजागरी पूर्णिमा और व्रत की पूर्णिमा मनाई जाएगी।

इस अवसर पर श्रद्धालु मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु, कुबेर और इंद्र की पूजा-अर्चना करेंगे। मिथिलांचल में नवविवाहित वर के घर पारंपरिक कोजगरा उत्सव की रौनक दिखेगी।

पंडित राकेश झा ने पंचांगों के हवाले से बताया कि आश्विन शुक्ल पूर्णिमा पर रेवती नक्षत्र और हर्षण योग का संयोग रहेगा।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों से अमृत वर्षा होती है। इसी विश्वास के साथ लोग खीर को रातभर चांदनी में रखते हैं। मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों के संपर्क में आने से खीर में विशेष गुण आ जाते हैं।

मां लक्ष्मी की आराधना से समृद्धि की कामना
पौराणिक मान्यताओं में शरद पूर्णिमा का विशेष महत्व है। इसे मां लक्ष्मी के प्राकट्य से जोड़कर देखा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं और जागकर उनकी आराधना करने वाले भक्तों पर कृपा बरसाती हैं। इसी कारण इसे कोजागरी पूर्णिमा भी कहा जाता है।

इस दिन श्रद्धालु गंगा स्नान, दान-पुण्य और पूजा-पाठ करेंगे। रात में मां लक्ष्मी और भगवान विष्णु की पूजा, विष्णु सहस्रनाम का पाठ तथा दीपदान की परंपरा निभाई जाएगी। मां लक्ष्मी के साथ कुबेर और इंद्र की पूजा कर धन-धान्य, सुख-समृद्धि और आरोग्य की कामना की जाएगी।

कई घरों में घी का दीपक जलाकर रात्रि जागरण भी किया जाएगा। शरद पूर्णिमा पर चंद्रमा की रोशनी में खीर रखने की परंपरा विशेष आकर्षण का केंद्र रहती है। इस रात चंद्रमा की किरणें अमृत के समान गुणकारी होती हैं और खीर ग्रहण करने से आरोग्य की प्राप्ति होती है

मिथिला में नवविवाहित वर का मनेगा कोजगरा
मिथिलांचल में शरद पूर्णिमा का संबंध नवविवाहित वर के कोजगरा उत्सव से भी है। 25 अक्टूबर को नवविवाहित वर के घर यह पारंपरिक पर्व मनाया जाएगा।

इस अवसर पर वधू पक्ष की ओर से वर के लिए नए वस्त्र, पान, मखाना, मिठाई, पाग, नारियल, सुपारी, धान, फल और अन्य पूजन व भोज्य सामग्री भेजी जाती है।

सामग्री को बांस के डाले में सजाकर भेजने की परंपरा भी है। 26 अक्टूबर को पूर्णिमा स्नान-दान और महर्षि वाल्मीकि जयंती मनाई जाएगी।

पंडित डॉ. राघव नाथ झा ने बताया कि दोनों तिथियों से जुड़ी परंपराओं का धार्मिक और सांस्कृतिक जीवन में विशेष महत्व है। खासतौर पर मिथिला में कोजगरा नवविवाहित वर के प्रथम कोजगरा के रूप में विशेष उल्लास से मनाया जाता है।

इस अवसर पर गोसाउन घर में कुलदेवता-कुलदेवी की पूजा-अर्चना और माता लक्ष्मी की आराधना की जाती है। नवदंपति को सुमन करने, मखाना-पान तथा पारंपरिक उपहारों के आदान-प्रदान की परंपरा है।

परिजनों और संबंधियों के जुटने से यह पर्व पारिवारिक आत्मीयता, नव दांपत्य के सम्मान और सुख-समृद्धि की मंगलकामना का अवसर बनता है।

शरद पूर्णिमा पूजा के शुभ मुहूर्त:
    अभिजित मुहूर्त: सुबह 11:11 से 11:56 बजे तक
    शुभ योग मुहूर्त: दोपहर 12:58 से 2:23 बजे तक
    प्रदोष काल: शाम 5:12 से 7:53 बजे तक
    अमृत मुहूर्त: शाम 6:48 से रात 8:23 बजे तक

 

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