
चंडीगढ़.
पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने हरियाणा सरकार द्वारा सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर लगाई गई पूर्ण पाबंदी को खारिज कर दिया है। अदालत ने इस फैसले को मनमाना और संवैधानिक अधिकारों का हनन बताते हुए सरकार के तर्कों पर कड़ा ऐतराज जताया।
मामले की सुनवाई करते हुए जस्टिस हरप्रीत सिंह बरार ने कहा कि सरकार की यह पाबंदी उसके द्वारा बताए गए उद्देश्यों के मुकाबले बेहद असंतुलित थी। अदालत ने टिप्पणी की कि सरकार का यह कदम "अखरोट तोड़ने के लिए भारी हथौड़े का इस्तेमाल करने जैसा है।" हाईकोर्ट ने सवाल उठाया कि किसी कर्मचारी को अपने पेशेवर कौशल को बढ़ाने के लिए विदेश जाने से रोकने से सरकार के ईंधन बचाने के लक्ष्य में भला कैसे मदद मिल सकती है?
क्या है पूरा मामला?
यह विवाद रोहतक स्थित PGIMS की नर्सिंग ऑफिसर शीतल रानी की याचिका से जुड़ा है। शीतल ने ऑस्ट्रेलिया में एक पेशेवर कोर्स और रजिस्ट्रेशन परीक्षा में शामिल होने के लिए छुट्टी की अर्जी दी थी। फरवरी 2021 में शीतल रानी PGIMS रोहतक में नर्सिंग ऑफिसर के पद पर तैनात हुईं। जनवरी 2024 में उन्हें ऑस्ट्रेलियाई वीजा आवेदन की मंजूरी मिली और बाद में विजिटर वीजा जारी हो गया। 29 सितंबर में ऑस्ट्रेलिया में उनकी परीक्षा निर्धारित थी, जिसके लिए उन्होंने 'अर्न्ड लीव' के लिए आवेदन किया।
क्यों खारिज हुई थी छुट्टी?
हरियाणा सरकार ने 10 जून को एक दिशा-निर्देश जारी किया था। इसके तहत सितंबर तक सरकारी कर्मचारियों के विदेश जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया था। इस नीति में केवल गंभीर मेडिकल इलाज के मामलों को ही छूट दी गई थी, जिसके चलते शीतल रानी की छुट्टी की अर्जी निरस्त कर दी गई थी। हाईकोर्ट ने सरकार के इस आदेश को पूरी तरह खारिज करते हुए संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिया है कि याचिकाकर्ता नर्सिंग ऑफिसर को परीक्षा में शामिल होने के लिए ऑस्ट्रेलिया जाने की तुरंत अनुमति दी जाए।



