मध्य प्रदेश

केन-बेतवा परियोजना: 17 दिन बाद खत्म हुआ ‘चिता आंदोलन’, प्रशासन ने प्रभावितों को बलपूर्वक हटाया, अनशन जारी

छतरपुर 
छतरपुर के कुपी गांव में बराना नदी के घाट पर केन-बेतवा लिंक परियोजना से प्रभावित परिवारों के 'चिता आंदोलन' ने तड़के नया मोड़ ले लिया। 

सुबह करीब 5 बजे जब पुलिस बल पहुंचा, तो बड़ी संख्या में महिला और पुरुष आंदोलनकारी नदी के बहते पानी में उतर गए। पुलिस अधिकारियों के समझाने के बाद भी जब वे बाहर नहीं आए, तो पुलिस टीमों ने नदी में उतरकर एक-एक कर सभी को जबरन बाहर निकाला और हिरासत में ले लिया।

बिजावर एसडीएम विजय द्विवेदी ने बताया कि यह कदम लगातार हो रही बारिश और प्रदर्शनकारियों के गिरते स्वास्थ्य को देखते हुए उठाया गया है। प्रदर्शन में शामिल पड़ोसी पन्ना जिले के लोगों को बसों से उनके गृह जिले रवाना कर दिया गया है।

प्रशासन ने अमित भटनागर को अस्पताल में भर्ती कराया है, जहां वे डॉक्टरों की निगरानी में हैं। इधर, भटनागर ने अस्पताल से ही अपना अनशन जारी रखने का ऐलान किया है।

300 आंदोलनकारियों को पुलिस ने हिरासत में लिया
केन बेतवा लिंक परियोजना के विस्थापन प्रभावित करीब 300 से अधिक आदिवासी परिवार छतरपुर जिले के किशनगढ़ ब्लॉक के अंतर्गत ग्राम कूपी में अमित भटनागर के नेतृत्व में आंदोलन कर रहे थे. यह आंदोलन चिता आंदोलन के नाम से चल रहा था, जो पिछले 17 दिनों से जारी था, जिसमें अमित भटनागर करीब 13 दिनों से आमरण अनशन पर थे। 

 अमित भटनागर सहित करीब 300 आंदोलनकारियों को हिरासत में लिया गया है. सभी आंदोलनकारी को पुलिस पन्ना लेकर आई है, जहां पर पन्ना के डायमंड चौराहे पर पुलिस प्रशासन और आंदोलनकरियों से काफी तीखी नोकझोंक हुई है। 

महिलाओं को घसीटने और बर्बरता से मारपीट का आरोप
आंदोलनकारी राकेश आदिवासी ने बताया कि "पुलिस ने बर्बरता से उनके साथ मारपीट की और उन्हें जबरन वहां से उठाकर बस में बैठाया गया. महिलाओं को घसीट कर ले जाया गया है, जिससे उनको चोटें भी आईं हैं. पुलिस हम लोगों को किशनगढ़ ग्राम कूपी से उठाकर पन्ना लेकर आई है, जहां से विश्रमगंज अजयगढ़ ले जा रही थी। 

इस दौरान कुछ लोग, जिन्हें चोट आई थी, वे इलाज के लिए जिला चकित्सालय पन्ना में जाना चाह रहे थे. लेकिन पुलिस बस नहीं रोकी. इसके बाद कुछ लोग जबरन पन्ना स्थित डायमंड चौराहे और लिशु आनंद विद्यालय के सामने उतर गए. वहीं, कुछ लोग पैदल डायमंड चौराहे पहुंचे, जहां पुलिस ने फिर से उन्हें बस में बैठा कर उन्हें गांव में छोड़ने की बात कह रही थी। 

मौके पर मौजूद आंदोलनकारी मीना आदिवासी ने पुलिस से कहा, "हमें आप लोगों के साथ नहीं जाना है. आप लोगों ने हमारे साथ अच्छा नहीं किया है. जबरन हम लोगों को उठाकर ले आए हैं. हमारी मांगे कोई सुन नहीं रहा है. हम यहीं रहेंगे और हमारे साथ मारपीट की गई है, हमें इलाज कराना है। 

वहीं, पुलिस इंस्पेक्टर हेमंत नायक ने बताया कि "इन लोगों को ग्राम कूपी से लेकर पन्ना जिले के ग्राम विश्रमगंज बस से छोड़ने जा रहे थे. जहां पर यह लोग डायमंड चौराहे पर उतर गए हैं। 

परियोजना में 400 करोड़ का भ्रस्टाचार का आरोप
आंदोलन की अगुवाई कर रहे अमित भटनागर ने इन परियोजनाओं में लगभग 400 करोड़ रुपये के भ्रष्टाचार होने के आरोप लगाए हैं. उन्होंने कहा, "मुआवजा का पैसा नेताओ के खातों में, अधिकारियों के रिशतेदारों के खातों में और दलालों के खातों में डाला गया है. मुआवजे का असली हकदार परेशान है। 

'आंदोलनकारी को कुछ होता है तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन की होगी'
आंदोलनकारी दिव्या अहिरवार ने वीडियो जारी कर आरोप लगाया कि "अमित भटनागर आज 400 करोड़ के भ्रष्टाचार का खुलासा करने वाले थे. लेकिन इस आंदोलन को बंद करने की साजिश कर की जा रही है. अगर अमित भटनागर या किसी आंदोलनकारी को कुछ होता है, तो इसकी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी। 

 

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