मध्य प्रदेश

अगले पांच साल तक जारी रहेगी प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना

भोपाल 

किसान कल्याण वर्ष में मध्यप्रदेश के किसानों को बडा तोहफा देते हुए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना को अगले पांच साल तक जारी रखने का फैसला लिया है। योजना के प्रभावी क्र‍ियान्वयन के लिये मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में बुधवार को हुई कैबिनेट बैठक में 11608.47 करोड़ रूपये स्वीकृत किये हैं।

प्राकृतिक आपदाओं से फसल क्षति होने पर किसानों को सहायता देने योजना का संचालन किया जा रहा है। योजना के क्रियान्वयन, फसल स्थिति और उपज निर्धारण में तकनीकी के उपयोग में मध्यप्रदेश अग्रणी राज्य है।

वर्ष 2023-24 में 35.18 लाख कृषक आवेदनों पर राशि रूपये 961.68 करोड़ का दावा भुगतान किया गया। वर्ष 2024-25 में 35.56 लाख कृषक आवेदनों पर राशि रूपये 275.86 करोड़ का दावा भुगतान किया गया।

प्रदेश में वर्ष 2016 से किसानों को प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का लाभ मिल रहा है। योजना में भागीदार किसानों को फसल नुकसान या क्षति होने पर वित्तीय सहायता मिलती है। खरीफ मौसम में बीमित राशि का 2 प्रतिशत, रबी मौसम में 1.5 प्रतिशत अधिकतम प्रीमियम किसानों द्वारा देय होता है। किसानों द्वारा देय प्रीमियम और बीमांकित प्रीमियम की दर के अंतर को सामान्य प्रीमियम सब्स‍िडी की दर माना जाता है। इसकी भागीदारी केन्द्र और राज्य द्वारा बराबर वहन की जाती है।

केन्द्र सरकार द्वारा सिंचित और असिंचित जिलों की फसलों में केन्द्र सरकार की प्रीमियम सब्स‍िडी की सीलिंग क्रमश: 25 प्रतिशत और 30 प्रतिशत की सीमा तक रखी गई है। यदि इस सीलिंग के अधिक दरें प्राप्त होती हैं तो अतिरिक्त भार राज्य शासन को वहन करना होता है। मध्यप्रदेश में क्षतिपूर्त‍ि स्तर का 80 प्रतिशत निर्धारित है। आगामी वर्षो में भी सभी फसलों के लिये क्षतिपूर्त‍ि का स्तर 80 प्रतिशत रखा गया है।

वैकल्पिक क्रियान्वयन मॉडल

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के क्रियान्वयन के लिये राज्य अपनी आवश्यकता अनुसार उपयुक्त मॉडल चुन सकता है।

पहला कप एण्ड सरप्लस शेयरिंग 80-110 मॉडल और दूसरा कप एण्ड केप सरप्लस शेयरिंग 60-130 मॉडल। कप एण्ड केप सरप्लस शेयरिंग 80-110 मॉडल के अंतर्गत कुल प्रीमियम के 110 प्रतिशत तक का क्लेम बीमा कम्पनी द्वारा वहन किया जाता है। 110 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त क्लेम राशि का वहन राज्य शासन द्वारा किया जाता है। 80 प्रतिशत से कम क्लेम बनने पर क्लेम एवं 80 प्रतिशत के अंतर की सरप्लस राशि बीमा कम्पनी द्वारा राज्य शासन को वापस की जाती है।

कप एण्ड केप सरप्लस शेयरिंग 60-130 मॉडल के अंतर्गत कुल प्रीमियम के 130 प्रतिशत तक का क्लेम बीमा कम्पनी द्वारा वहन किया जाता है। 130 प्रतिशत से अधिक अतिरिक्त क्लेम राशि का वहन राज्य शासन एवं केन्द्र सरकार द्वारा बराबर अनुपात में किया जाता है। 60 प्रतिशत से कम क्लेम बनने पर क्लेम एवं 60 प्रतिशत के अंतर की सरप्लस राशि बीमा कम्पनी द्वारा राज्य शासन एवं केन्द्र सरकार को वापस की जाती है। मॉडल पर निर्णय गुण-दोष के आधार पर लिया जायेगा।

किसानों को फायदें

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना प्राकृतिक आपदाओं के कारण आर्थिक हानि होने पर किसानों को मदद करती है। इस योजना के तहत किसानों के द्वारा भुगतान की जाने वाली बीमा की प्रीमियम राशि को बहुत ही कम रखा गया है। छोटे किसान भी इस योजना का लाभ उठा रहे हैं। यह योजना 2 प्रतिशत (खरीफ फसलें), 1.5 प्रतिशत (रबी फसलें) और 5 प्रतिशत (वार्षिक वाणिज्यिक और बागवानी फसलें) की प्रीमियम दर पर किसानों के व्यय को कम करने और किसानों की आय को स्थिर करने के उद्देश्य से फसल विफलता होने पर एक व्यापक बीमा कवर देती है।

प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना का क्रियान्वयन प्रदेश के जिलों में 11 क्लस्टर्स में किया जा रहा है। प्रत्येक क्लस्टर के लिये बीमा कंपनियों का चयन निविदा के माध्यम से किया गया है।

फसल उपज का आंकलन सेटेलाईट आधारित रिमोट सेसिंग तकनीक से किया जा रहा है। इसके लिये कृषि विभाग द्वारा नेशनल रिमोट सेसिंग केन्द्र (इसरो), मध्यप्रदेश काउसिंल ऑफ साइंस एण्ड टेक्नोलॉजी, मध्यप्रदेश स्टेट इलेक्ट्रानिक्स कार्पोरेशन से समझौता किया गया है। मौसम सूचना तंत्र एवं डाटा प्रणाली का उपयोग कर योजना का क्र‍ियान्वयन किया जायेगा।

 

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