
फतेहाबाद.
मोबाइल एप्स पर तीन दिन फ्री ट्रायल और ₹1 सब्सक्रिप्शन जैसे आकर्षक आफर अब लोगों के लिए परेशानी का कारण बनते जा रहे हैं। साइबर अपराधी इन आफरों के जरिए लोगों को अपने जाल में फंसा रहे हैं और ट्रायल स्वीकार करते ही बैंक खातों से रकम कटनी शुरू हो जाती है।
पुलिस ने इसको लेकर आमजन के लिए विशेष साइबर एडवाइजरी जारी कर सतर्क रहने की अपील की है। साइबर विशेषज्ञों के अनुसार ठग इंटरनेट मीडिया और विभिन्न आनलाइन प्लेटफार्म पर विज्ञापन चलाकर लोगों को मोबाइल ऐप डाउनलोड करने के लिए प्रेरित करते हैं। ऐप इंस्टाल करते समय यूजर को फ्री ट्रायल, ₹1 में प्रीमियम सेवा या सीमित समय का आफर दिखाया जाता है। कई लोग बिना शर्तें पढ़े आई एग्री या सब्सक्राइब पर क्लिक कर देते हैं। इसके बाद एप बैंक खाते, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड या यूपीआई से आटो-पे की अनुमति ले लेता है।
एप डिलीट करने के बाद भी जारी रहती है कटौती
ट्रायल अवधि समाप्त होने के बाद बिना स्पष्ट सूचना के हर माह या सालाना आधार पर 499 रुपये, 899 रुपये या इससे अधिक राशि खाते से कटने लगती है। कई मामलों में लोग एप को मोबाइल से हटाने के बाद भी सुरक्षित महसूस करते हैं, लेकिन आटो-पे बंद न होने के कारण कटौती लगातार जारी रहती है।
जब तक उपभोक्ता बैंक स्टेटमेंट नहीं देखते, तब तक उन्हें ठगी का पता नहीं चलता। विशेषज्ञों का कहना है कि यह साइबर ठगी आर्थिक नुकसान के साथ मानसिक तनाव भी बढ़ा रही है। खासकर युवा और बुजुर्ग ऐसे ऑफरों का आसानी से शिकार बन रहे हैं।
ऐसे करें खुद को सुरक्षित
साइबर ठगी से बचने के लिए किसी भी ऐप को डाउनलोड करने से पहले उसकी प्रामाणिकता, रेटिंग और रिव्यू अवश्य जांचें। टर्म्स एंड कंडीशंस पढ़े बिना किसी आफर को स्वीकार न करें। बैंक खाते या कार्ड से जुड़े आटो-पे और स्टैंडिंग इंस्ट्रक्शन की समय-समय पर जांच करते रहें। अनजान एप को कार्ड या नेट बैंकिंग की अनुमति देने से बचें। केवल ऐप डिलीट करना पर्याप्त नहीं होता, बल्कि संबंधित प्लेटफार्म पर जाकर आधिकारिक रूप से सब्सक्रिप्शन कैंसिल करना जरूरी है। परिवार के सदस्यों, विशेषकर बच्चों और बुजुर्गों को भी इस ऑनलाइन ठगी के बारे में जागरूक करना आवश्यक है।
फ्रॉड होने पर तुरंत उठाएं कदम
यदि खाते से बिना अनुमति राशि कटने लगे तो तुरंत बैंक से संपर्क कर ऑटो-पे बंद करवाएं। जरूरत पड़ने पर कार्ड ब्लाक कराएं और साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत दर्ज करवाएं। आनलाइन शिकायत cybercrime.gov.in पर भी दर्ज कराई जा सकती है। एसपी निकिता खट्टर ने कहा कि साइबर अपराधी लगातार नए तरीके अपनाकर लोगों को निशाना बना रहे हैं। इसलिए किसी भी लालच में आकर अपनी बैंकिंग जानकारी साझा न करें। सतर्कता और जागरूकता ही साइबर ठगी से बचाव का सबसे प्रभावी तरीका है।



