झारखंड/बिहारराज्य

रांची की मेयर प्रत्याशी रोशनी खलखो खर्च करने में सबसे आगे, पार्षदों में अलीशा ने सबको पछाड़ा

रांची.

रांची नगर निगम क्षेत्र में महापौर (आम) चुनाव 2026 के तहत जारी व्यय जांच रिपोर्ट में रोशनी खलखो और विनोद कुमार बड़ाइक सबसे अधिक खर्च करने वाले प्रत्याशियों में शामिल रहे हैं. रोशनी खलखो ने अब तक सर्वाधिक 2,70,108 रुपये खर्च दर्शाया है, जबकि विनोद कुमार बड़ाइक 43,853 रुपये के साथ दूसरे स्थान पर हैं.

सबसे कम खर्च दर्शाने वाले प्रत्याशी सुजीत विजय आनंद कुजूर रहे, जिन्होंने 14,600 रुपये का हिसाब दिया है. रिपोर्ट के अनुसार 12, 16 और 20 फरवरी तक चुनावी खर्च का ब्योरा जमा करना अनिवार्य था.

पूर्व मेयर रमा खलखो ने अपना कुल खर्च 19,546 रुपये बताया
रोशनी खलखो और विनोद कुमार बड़ाइक के बाद सुरेंद्र लिंडा (43,500 रुपये), प्रवीण कच्छप (31,096 रुपये), सोनू खलखो (21,742 रुपये) और रमा खलखो (19,546 रुपये) ने अपना-अपना व्यय विवरण प्रस्तुत किया है. वहीं किरण कुमारी मुंडा, देवी दयाल मुंडा, सुजाता कच्छप और सुमन कांत तिग्गा निर्धारित तिथि तक व्यय लेखा प्रस्तुत करने में अनुपस्थित पाये गये. प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि समय सीमा के भीतर खर्च का पूरा लेखा-जोखा जमा करना सभी प्रत्याशियों के लिए अनिवार्य है. अनुपस्थित रहने वाले उम्मीदवारों पर आगे कार्रवाई की संभावना से भी इनकार नहीं किया गया है.

वार्ड प्रत्याशियों में अलीशा ने किया सबसे अधिक खर्च
वहीं, वार्ड प्रत्याशियों में अलीशा हक ने अब तक सबसे अधिक खर्च किया है. वह वार्ड- 03 की प्रत्याशी है. उन्होंने अब तक सर्वाधिक 62,763 रुपये खर्च कर सभी वार्डों में शीर्ष स्थान हासिल किया है. इसके विपरीत वार्ड-02 की रुपम कुमारी झा ने मात्र 500 रुपये खर्च दिखाकर सबसे कम व्यय दर्ज कराया है. जारी रिपोर्ट के अनुसार, वार्ड-03 में ही हुस्ना आरा ने 54,573 रुपये खर्च कर दूसरा स्थान पाया है. वार्ड-06 की सुषमा खलखो ने 43,080 रुपये और वार्ड-05 की मोनिका खलखो ने 38,987 रुपये व्यय दर्शाया है. वहीं वार्ड-13 की हनी रूची धान ने 900 रुपये खर्च दर्ज किया है. सीमा उरांव ने 1,392 रुपये और निर्मला गाड़ी ने 17,263 रुपये का व्यय प्रस्तुत किया है. जांच प्रक्रिया के दौरान आशा कच्छप, कविता बिन्हा, गंगिया लिंडा, गीता कुमारी और लक्ष्मी कच्छप उपस्थित नहीं रहीं. कई वार्डों में आधे से अधिक प्रत्याशी अनुपस्थित पाये गये, जिसे प्रशासन ने गंभीरता से लिया है.

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