भारत-ईयू डील से बांग्लादेश की ‘बादशाहत’ पर संकट, अरबों के ट्रेड पर पड़ सकता असर

नई दिल्ली
भारत और यूरोपीय संघ (ईयू) के बीच लंबे समय से अटका पड़ा मुक्त व्यापार समझौता (FTA) आखिरकार 27 जनवरी को साइन हो ही गया। इस समझौते के बाद भारतीय वस्त्र एवं परिधान उद्योग के लिए बड़े अवसर खुलते दिख रहे हैं। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने मंगलवार को कहा कि इस समझौते से भारत के वस्त्र निर्यात में तेज उछाल आ सकता है और यह सेक्टर मौजूदा करीब 7 अरब डॉलर से बढ़कर बहुत कम समय में 30 से 40 अरब डॉलर तक पहुंचने की क्षमता रखता है। इससे श्रम-प्रधान इस क्षेत्र में 60-70 लाख नई नौकरियों के सृजन की संभावना है।
बांग्लादेश के प्रभुत्व को चुनौती और बराबरी का मौका
पीयूष गोयल ने इस बात का जिक्र किया कि अक्सर यह सवाल पूछा जाता था कि बांग्लादेश कपड़ा निर्यात में भारत से इतना आगे क्यों है। दरअसल बांग्लादेश एक 'कम विकसित देश' (LDC) है, इसलिए उसे यूरोपीय बाजार में जीरो ड्यूटी (शून्य शुल्क) का लाभ मिलता है। इसी कारण बांग्लादेश ने यूरोपीय संघ के 250 अरब डॉलर के कपड़ा बाजार में से 30 अरब डॉलर पर कब्जा जमा लिया है। भारत अभी तक केवल 7 अरब डॉलर का निर्यात करता है और भारतीय सामानों पर 12% तक की ड्यूटी लगती है। इस FTA के लागू होते ही भारत ड्यूटी के मामले में बांग्लादेश के बराबर आ जाएगा, जिससे भारतीय निर्यातकों के लिए प्रतिस्पर्धा करना आसान होगा। केंद्रीय मंत्री गोयल ने कहा- अब जब FTA लागू होगा, भारत भी ड्यूटी के मामले में बांग्लादेश के बराबर हो जाएगा। इससे भारतीय निर्यातकों को समान प्रतिस्पर्धी अवसर मिलेगा।
वस्त्र उद्योग: कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगारदाता
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत में वस्त्र उद्योग कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा रोजगार देने वाला क्षेत्र है, जिसमें लगभग 4 करोड़ लोग काम करते हैं। वर्तमान में भारत यूरोपीय संघ को सालाना करीब 7 अरब डॉलर के वस्त्र और परिधान निर्यात करता है, जिन पर 12 फीसदी तक आयात शुल्क लगता है। FTA लागू होते ही यह शुल्क समाप्त हो जाएगा, जिससे भारत का निर्यात तेजी से बढ़ सकता है।
समझौते का दायरा और 'पहले दिन से' लाभ
पीयूष गोयल ने बताया कि इस समझौते के तहत भारतीय सामानों को अभूतपूर्व बाजार पहुंच मिलेगी। यह समझौता भारत से यूरोपीय संघ को होने वाले कुल निर्यात का लगभग 99% और यूरोपीय संघ से भारत को होने वाले निर्यात का 97% कवर करता है। कपड़ा, परिधान, गृह सज्जा और फर्निशिंग जैसे क्षेत्रों को, जिनमें श्रमिकों का हित सबसे ज्यादा है, उनको पहले दिन से शुल्क मुक्त पहुंच मिलेगी। वर्तमान में यूरोपीय बाजार में भारत की हिस्सेदारी बहुत कम है (वस्तुओं में 1.5% और सेवाओं में 2.5%), जो अब तेजी से बढ़ने के लिए तैयार है।
कार्बन टैक्स (CBAM) की चुनौती और समाधान
समझौते में आधुनिक नियामक चुनौतियों, विशेष रूप से यूरोपीय संघ के 'कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म' (CBAM) पर भी ध्यान दिया गया है। वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि CBAM एक क्षैतिज विनियमन है जो दुनिया भर के सभी भागीदार देशों पर लागू होता है। इस समस्या से निपटने के लिए एक 'तकनीकी संवाद' स्थापित किया जाएगा। भारतीय एजेंसियों को मान्यता दी जाएगी ताकि वे यूरोपीय मानकों के अनुसार भारत में ही कार्बन उत्सर्जन का सत्यापन कर सकें। दोनों पक्ष तकनीकी प्रक्रियाओं पर सहयोग करेंगे ताकि भारतीय निर्यातकों को यूरोप में अपनाई जाने वाली माप पद्धतियों को लेकर कोई परेशानी न हो।



