दुमका नगर परिषद का अध्यक्ष पद अनारक्षित, नए समीकरणों में हर कोई ताल ठोकने को तैयार

रांची/दुमका.
नगर निकाय चुनाव की शोर अब तेज होने लगा है। उम्मीद है कि जनवरी माह के अंतिम सप्ताह में चुनाव की अधिसूचना भी जारी हो जाए। दुमका नगर परिषद का अध्यक्ष पद पहली बार अनारक्षित घोषित किया गया है। इससे पूर्व हुए तीन चुनावों में दुमका नगर परिषद की सीट महिला के लिए आरक्षित थी। इस लिहाज से दुमका में अबकी बार का चुनाव न सिर्फ तीखा होने की गुंजाइश है, बल्कि चुनावी समीकरणों को भी नए सिरे से साधा जाएगा।
चुनाव दलगत हो या फिर गैर दलगत दोनों ही परिस्थितियों में राजनीतिक दलों के रणनीतिकारों की भूमिका व क्षमता का भी आकलन होगा। राजनीतिक दल अपनी जमीनी ताकत बनाए रखने के लिए कसरत व मगजमारी करेंगे। बहरहाल, दुमका में अध्यक्ष पद के अनारक्षित होने की घोषणा के बाद अब चुनावी दंगल में ताल ठोंकने का मन बना रहे प्रत्याशी कुलबुलाने लगे हैं।
कड़ाके की ठंड के बीच इनके समर्थक न सिर्फ खुद को चार्ज करने में जुट गए हैं, बल्कि मतदाताओं तक भी यह संदेश बखूबी पहुुंचा रहे हैं। कुछ ऐसे भी हैं जो इंटरनेट मीडिया के भरोसे ही अपनी ब्रांडिंग शुरू कर दी है। दुमका के धीरेन चाय की दुकान पर अब शाम की मजलिस में नगर परिषद के चुनाव की चर्चा चाय की गर्मागर्म भांप से निकल रही है।
एक बुजुर्ग व्यक्ति ने कहा कि लंबे समय से लोगों को चुनाव का इंतजार था। अब इंतजार खत्म होने वाला है। चुनाव होने से दुमका शहर के लोगों को आने वाले दिनों में एक बार फिर से उनकी लोकल सरकार मिल जाएगी। नए-नए वायदे, नए-नए इरादों के साथ प्रत्याशी भी मतदाताओं को रिझाएंगे और फिर समीकरणों के आसरे चुनाव में जीत-हार के भागीदार बनेंगे। उस बुजुर्ग के दूसरे साथी ने कहा कि इस बार का चुनाव भी काफी तीखा होने वाला है। नए तरीके से मतदाताओं को गोलबंद करने का फार्मूला सेट किया जाएगा, लेकिन अहम मुद्दाें पर प्रत्याशी कितना बहस कर पाएंगे यह सवाल सबसे अहम है।
मुद्दा यह कि दुमका का समग्र विकास कब होगा। दुमका उपराजधानी के लुक में कब आएगा। दुमका शहर के लोगों को क्वालिटी लाइफ कब नसीब होगी। क्या दुमका के लोग बजबजाती नालियां, कचड़ों के चौराहे व पहाड़ के बीच ही जीवन बसर करते रहेंगे।
उन्होंने कहा कि जब से नगर परिषद बोर्ड भंग हुआ है तब से लेकर आज तक जनप्रतिनिधियों ने भी चुपी साध रखी थी। शहर के लोग अपनी समस्याओं से जूझते रहे लेकिन कभी किसी ने जनमुद्दों पर जोरदार तरीके से आवाज बुलंद करना मुनासिब नहीं समझा। अब जब चुनाव की डुगडुगी बजने लगी है तो हर कोई फिर से अपनी बांहों को फैलाने लगे हैं। कहा कि दुमका की जनता को भी इस चुनाव में मुखर होकर प्रत्याशियों से तीखे सवाल भी करने की जरूरत है।



